Screen Reader Access Skip to Main Content Font Size   Increase Font size Normal Font Decrease Font size
Indian Railway main logo
खोज :
Find us on Facebook   Find us on Twitter Find us on Youtube View Content in English
National Emblem of India

हमारे बारे में

समाचार एवं भर्ती सूचना

निविदाएं

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

कालका-शिमला हैरिटेज साईट

हमसे संपर्क करें



 
Bookmark Mail this page Print this page
QUICK LINKS

स्वर्ण मंदिर, श्री हरमंदिर साहिब

पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर अथवा दरवार साहिब सिखों का सबसे पवित्र मंदिर है । समूचे विश्व में यह मंदिर सिखों के विश्वास और आस्था का प्रतीक है । दरबार साहिब के विकास क्रम में सिख विचार धारा और इतिहास का गहरा मेल है । मंदिर की वास्तुकला में प्रार्थना के विभिन्न प्रतीक भी सम्मलित हैं । 

 

वाराणसी

विश्व का प्राचीनतम जीवंत शहर वाराणसी जन्म और पुनर्जन्म से मुक्त होने की आकांक्षा रखने वाले हिन्दू तीर्थ यात्रियों का पवित्र स्थल है । शिव और पार्वती का निवास होने के कारण इसे पूज्य माना जाता है । वाराणसी में गंगा की उपस्थिति को पतितपावनी शक्ति के रूप में माना जाता है । कोई नहीं जानता कि वाराणसी शहर कब अस्तित्व में आया पर हिन्दुओं की इस शहर के प्रति अगाध श्रद्धा निर्विवाद है । अब के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित इस शहर की प्राचीन गाथा वक्त के साथ धूमिल पड़ चुकी है । फिर भी ऐसा कहा जाता है कि शिव और पार्वती इस शहर के पहले नागरिक थे । यह माना जाता है कि शिव के सिर से उतरने वाली जीवनदायिनी गंगा मानव जाति के पापों को धोने के लिए अवतरित हुई थीं । वाराणसी ही वह जगह है जहां यह एक विशालकाय नदी का रूप ले लेती है । लाखों श्रद्धालुगण इस पवित्र शहर में अपने पापों को धोने के लिए आते हैं वाराणसी शब्द गंगा की दो सहायक नदियों वरूणा और असि का संयुक्त रूप है । वाराणसी शहर इन्ही दोनों सहायक नदियों के मध्य स्थित है । इतिहासकारों के मतानुसार यह शहर ईसा से 10 शताब्दी पूर्व अस्तित्व में आया । पवित्र ग्रंथ वामन पुरान और बौद्ध साहित्य में इसका विवरण मिलता है ।

 

वैष्णो देवी यात्रा तीर्थ

Vaishno Devi Yatraदंतकथा है कि सात सौ से भी अधिक वर्ष पहले भगवान विष्णु की एक भक्त भगवान राम की पूजा अर्चना किया करती थी और उस भक्त ने ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की थी । एक दिन असुरों के देवता भैंरोनाथ ने उसे देखा और उस पर आसक्त होकर उसका पीछा किया । बाणगांगा के निकट देवी को प्यास लगी तो उन्होंने भूमि में एक तीर मारा जहां से जल की धारा फूट पड़ी । चरणपादुका, अर्थात उनके पैरों के चिन्ह, वह स्थान है जहां पर देवी ने विश्राम किया था । उसके बाद उन्होंने अर्धक्वारी में ध्यान साधना की । त्रिकुटा पर्वत में 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित वैष्णो देवी तीर्थ एक पवित्र गुफा है । जम्मू से 61 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गुफा 30 मीटर लम्बी और 15 मीटर चौड़ी है । गुफा के दूसरे छोर पर देवी के तीन रूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित पवित्र मंदिर हैं । तीर्थयात्री छोटे-छोटे समूहों में एक सकरे रास्ते होते हुए तथा बर्फ जैसे ठण्डे पानी से गुजरते हुए यहां तक पहुंचते हैं । दंत कथा के अनुसार असुर भैंरोनाथ से बचने के लिए देवी इसी गुफा में छुप गयीं थी । बाद में देवी ने उस असुर का वध कर दिया । वैष्णों देवी तीर्थ तक कटरा, जोकि वैष्णों देवी से 13 की दूरी पर स्थित है, से जाया जा सकता है । कटरा से तीर्थयात्री एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़ कर बाणगंगा पहुंचते हैं । बाणगंगा के बारे में यह प्रसिद्ध है कि इसी स्थान पर देवी ने अपनी प्यास बुझाई थी । यहां से 6 किलोमीटर आगे अर्धक्वारी की प्रसिद्ध गुफा है । यहां पर देवी ने नौ माह तक ध्यान साधना की थी ।


 

हरिद्वार

Haridwarपवित्र गंगा के दाहिने तट पर स्थित हरिद्वार से ही गंगा नदी उत्तर के समतल मैदानों की अपनी यात्रा प्रारम्भ करती है । भगवान शिव और भगवान विष्णु की महिमागाथा से जुड़ा हरिद्वार भारत के सात पवित्र शहरों में से एक है । प्रत्येक बारह वर्ष के पश्चात आयोजित होने वाले कुम्भ के चार स्थलों में हरिद्वार भी है । मौलिक रूप से धार्मिक आस्था का केन्द्र हरिद्वार श्रद्धालुओं के गहरे विश्वास का प्रतीक है । औषधीय जड़ी बुटियों का केन्द्र होने के साथ-साथ यह गुरूकुल कांगड़ी के पारंपरिक शिक्षा का भी केन्द्र है । शिवालिक की पर्वत श्रेणियों में स्थित यह शहर गंगा के तट पर बसा है । श्रद्धालुओं की गहन आस्था का केन्द्र यह शहर देश के सभी प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा है । वस्तुत: रेलगाड़ियों से ही काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं । हरिद्वार 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है । इस स्थान का मौसम समुद्रतल से अधिक ऊंचाई पर स्थित किसी पर्वतीय क्षेत्र की तरह ठण्डा नहीं रहता ।




Source : उत्तर रेलवे / भारतीय रेल पोर्टल CMS Team Last Reviewed on: 29-06-2012  


  प्रशासनिक लॉगिन | साईट मैप | हमसे संपर्क करें | आरटीआई | अस्वीकरण | नियम एवं शर्तें | गोपनीयता नीति Valid CSS! Valid XHTML 1.0 Strict

© 2010  सभी अधिकार सुरक्षित

यह भारतीय रेल के पोर्टल, एक के लिए एक एकल खिड़की सूचना और सेवाओं के लिए उपयोग की जा रही विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं द्वारा प्रदान के उद्देश्य से विकसित की है. इस पोर्टल में सामग्री विभिन्न भारतीय रेल संस्थाओं और विभागों क्रिस, रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा बनाए रखा का एक सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है.